Author(s): Nitin Kumar
शोध आलेख सार: वस्तुतः चीन भारत का एक ऐसा पडोसी राज्य है जो उत्तर व पश्चिमी उत्तर दिशा से भारत की सुरक्षा को चुनौती देता रहा है। वर्ष 1962 में भारत पर चीनी हमले का इतिहास सर्वविदित है। वैसे तो स्वतंत्रता के बाद भारत ने हमेशा ही चीन व अन्य पडोसी देशो के साथ शांतिपुर्ण ढंग से अपने संबंधो का संचालन किया है। आज के बदलते वैश्विक परिवेश में भारत व चीन एशिया के दो सबसे बडे राष्ट्र हैं, जिनकी विश्व की कुल आबादी का 35 प्रतिशत निवास करता है तथा वैश्विक राजनीति में दोनों राष्ट्र के सामान्य हित हैं और वैश्विकरण के द्वारा उत्पन्न इनके राष्ट्रीय सम्प्रभुता, गरिमा एवं चुनौतियां भी सामान्य हैं। शीतयुद्धोतर काल के पश्चात भारत में वैश्वीकरण आने के बाद में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को वैश्विक बनाया एवं धीरे-धीरे 21वीं सदी मंे परिवर्तित कर दिया है। दोनों राष्ट्रांे एशियन अर्थव्यव्स्था के स्तम्भ होने के साथ साथ ऐसे जुड़वां ईंजन है जो एशियन अर्थव्यव्स्था को संचालित करते हैं। चंूकि ये दोनों देश आर्थिक विकास के मार्ग पर अग्रसर है और विश्व शक्ति बनने की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहें हैं। परंतु आज भी दोनों देशो में सीमा विवाद, जल विवाद, सीमा सुरक्षा व माओवादी गतिविधियों को लेकर तनाव देखने को मिलता हैं। फिर भी हम इस तथ्य को नही नकार सकते कि द्विपक्षीय संबंधों को लेकर दोनों देशों के सांझा हित हैं जो दोनो देशों के बीच तनाव को कम करते है। प्रस्तुत शोध पत्र में भारत-चीन संबंधों की विवेचना की गयी हैं।.
मुख्य शब्द: दक्षिण एशिया, शीत युद्ध, सीमा विवाद, वैश्वीकरण, सुरक्षा चुनौतियां।
DOI:10.61165/sk.publisher.v12i4.3
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बदलते वैश्विक परिवेश में भारत-चीन संबंधों का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Pages:20-23
